आसनसोल में ‘बिहारी बाबू’ शत्रुघ्न सिन्हा क्या BJP को फिर करेंगे ‘खामोश’?

ATH NEWS GROUP OF MEDIA :-आसनसोल लोकसभा सीट चुनाव के दौरान काफी सुर्खियों में रहा है. बॉलीवुड के फिल्म स्टार शत्रुघ्न सिन्हा को टीएमसी ने फिर से उम्मीदवार बनाया है, जबकि बीजेपी ने पहले भोजपुरी स्टार पवन सिंह को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन पवन सिंह के इनकार करने के बाद बीजेपी ने बर्दवान-दुर्गापुर के सांसद एसएस अहलुवालिया को उम्मीदवार बनाया है. वहीं, माकपा की जहांनारा खान चुनाव मैदान में हैं. पवन सिंह को लेकर उठे विवाद के बाद इस सीट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं. अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या बीजेपी इस सीट को फिर से टीएमसी से छीन पाएगी?

एग्जिट पोल सर्वे का अनुमान है कि टीएमसी के उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा फिर से इस लोकसभा सीट से जीत हासिल कर सकते हैं और बीजेपी को पराजय का सामना करना पड़ सकता है.

एग्जिट पोल के अनुमान के अनुसार शत्रुघ्न सिन्हा को 49.07 फीसदी मत मिल सकते हैं, जबकि बीजेपी के उम्मीदवार एसएस अहलुवालिया को 34.21 फीसदी मत मिल सकते हैं.

लोकसभा उपचुनाव में शत्रुघ्न सिन्हा ने हासिल की थी जीत

यह लोकसभा सीट पर साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार बाबुल सुप्रियो विजयी रहे थे, लेकिन मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज होकर उन्होंने बीजेपी से नाता तोड़ दिया और सांसद पद से इस्तीफा दे दिया. टीएमसी ने उन्हें बालीगंज विधानसभा उपचुनाव में चुनाव लड़ाया और जीत हासिल की. फिलहाल वह ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में मंत्री हैं. वहीं, 2022 में लोकसभा उपचुनाव हुए. इसमें शत्रुघ्न सिन्हा ने बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल को पराजित किया था.

इसके पहले साल 2019 में शत्रुघ्न सिन्हा को बिहार की पटना साहिब लोकसभा सीट से रविशंकर प्रसाद ने पराजित कर जीत हासिल की थी. उसके बाद वह ममता बनर्जी के बुलावे पर बंगाल पहुंच गये और बंगाल में ममता बनर्जी ने उन्हें उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया और उन्होंने जीत हासिल की थी. आसनसोल लोकसभा सीट पर लंबे समय से बीजेपी का कब्जा था. शत्रुघ्न सिन्हा की जीत के साथ टीएमसी पहली बार इस सीट पर कब्जा कर पाई थी.

आसनसोल से दो बार जीते थे बाबुल सुप्रियो

बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार बाबुल सुप्रिया को 6 लाख 33 हजार 378 वोट मिले. उनके खिलाफ मुनमुन सेन तृणमूल उम्मीदवार थीं. उन्हें 4 लाख 35 हजार 741 वोट मिले थे. मुनमुन सेन को पराजय का सामना करना पड़ा था. उससे पहले साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बाबुल सुप्रियो ने टीएमसी की उम्मीदवार डोला सेन को पराजित किया था. उसके बाद वह मोदी मंत्रिमंडल में पहली बार मंत्री बनाए गये थे.

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